मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक में भी करोड़ों का घोटाला, यह भी बिना समान खरीदे हो रहा था करोड़ों का भुगतान

जबलपुर में ‘मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक’ योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जिस योजना का मकसद गरीबों को उनके घर के पास मुफ्त इलाज और दवाएं उपलब्ध कराना था, उसी योजना में अब करोड़ों के घोटाले की परतें खुलने लगी हैं।

मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक में भी करोड़ों का घोटाला, यह भी बिना समान खरीदे हो रहा था करोड़ों का भुगतान
मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक

जबलपुर में ‘मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक’ योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जिस योजना का मकसद गरीबों को उनके घर के पास मुफ्त इलाज और दवाएं उपलब्ध कराना था, उसी योजना में अब करोड़ों के घोटाले की परतें खुलने लगी हैं।

जांच में सामने आया है कि कई क्लीनिकों में न कंप्यूटर हैं, न बीपी मशीन और न ही पिछले दो साल से पुताई हुई है, लेकिन रिकॉर्ड में मरम्मत, पुताई और उपकरण खरीदी के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया। कलेक्टर के निर्देश पर डिप्टी कलेक्टर रघुवीर सिंह मरावी की टीम ने जब क्लीनिकों का निरीक्षण किया तो कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।

बिना समान खरीदे ही कर दिया करोड़ों का भुगतान

जांच में पता चला कि बिना सामान खरीदे ही करीब पौने दो करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। इतना ही नहीं, जांच शुरू होने के मात्र तीन दिन पहले आनन-फानन में कुछ केंद्रों पर प्रिंटर भिजवा दिए गए, जबकि कई क्लीनिकों में कंप्यूटर तक मौजूद नहीं हैं।

 93 लाख का सामान न तो स्टोर में और न ही क्लीनिक में

प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार लगभग 93 लाख रुपये का सामान न तो स्टोर में मिला और न ही किसी क्लीनिक में। भंडार शाखा के रजिस्टर में फर्जी एंट्रियां भी पाई गई हैं। कई क्लीनिकों में अलमारियां तक नहीं हैं, जबकि उनके नाम पर भुगतान हो चुका है।

भोपाल से भी कुछ अधिकारियों की संलिप्तता संदिग्ध

फिलहाल डिप्टी कलेक्टर की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई है। इस पूरे मामले में न केवल स्थानीय स्तर बल्कि भोपाल स्तर के कुछ बड़े अधिकारियों की संलिप्तता भी संदिग्ध बताई जा रही है। रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में बड़ी कार्रवाई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

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